Blog • 16/7/2026
बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर — 9वाँ ज्योतिर्लिंग, कामना लिंग | Complete Guide 2026
Varun Arora
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बाबा बैद्यनाथ धाम का इतिहास और पौराणिक कथा
रावण की तपस्या और शिवलिंग की स्थापना
बैद्यनाथ धाम की स्थापना से जुड़ी कथा उतनी ही रोचक है जितनी भव्य यह मंदिर। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लंका के राजा रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की। अपनी भक्ति के प्रमाण में उसने एक-एक करके अपने दस सिर काटकर हवन में अर्पित कर दिए।
रावण की अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे एक दिव्य शिवलिंग प्रदान किया और कहा — "जहाँ भी इसे धरती पर रखोगे, यह वहीं स्थापित हो जाएगा।"
रावण लंका की ओर चल पड़ा। देवताओं को चिंता हुई। उन्होंने भगवान गणेश से सहायता माँगी। गणेश जी बालक का रूप धारण करके रावण के पास पहुँचे। रावण ने जब प्रकृति की पुकार पर कुछ क्षण के लिए बालक को शिवलिंग थमाया, तो गणेश जी ने उसे धरती पर रख दिया। शिवलिंग वहीं स्थापित हो गया — और यही स्थान आज बैद्यनाथ धाम कहलाता है।
'बैद्यनाथ' नाम क्यों?
एक अन्य प्रसिद्ध मान्यता के अनुसार, रावण के शीशों को काटने से जो घाव हुए थे, उन्हें भगवान शिव ने स्वयं वैद्य (चिकित्सक) के रूप में ठीक किया था। इसीलिए भगवान शिव यहाँ 'बैद्यनाथ' — यानी वैद्यों के नाथ, रोगों के नाशक — के रूप में पूजे जाते हैं।
ज्योतिर्लिंग + शक्तिपीठ — एक ही स्थान पर
यह बात बहुत कम लोग जानते हैं कि बाबा बैद्यनाथ धाम केवल ज्योतिर्लिंग नहीं है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहाँ माता सती का हृदय गिरा था, इसलिए यह 51 शक्तिपीठों में से एक — 'हृदयपीठ' — भी है। यहाँ माता जय दुर्गा के रूप में विराजमान हैं। इस दुर्लभ संयोग के कारण बैद्यनाथ धाम में पहले माता की पूजा होती है, फिर बाबा की।
मंदिर परिसर — 21 मंदिरों का दिव्य संसार
बाबा बैद्यनाथ धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि एक विशाल धार्मिक परिसर है जिसमें 21 प्राचीन मंदिर स्थित हैं। यहाँ की पूरी यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक इन मंदिरों का दर्शन न हो।
मुख्य शिवलिंग के अलावा परिसर में माँ अन्नपूर्णा, माँ पार्वती, माँ काली, काल भैरव, गौरी-शंकर, हनुमान जी, गणेश जी, सूर्यनारायण और माँ सरस्वती के मंदिर प्रमुख हैं। मंदिर का निर्माण Nagara वास्तुशैली में हुआ है। मुख्य शिखर की ऊँचाई लगभग 70–75 फीट है, जिसके ऊपर सोने का कलश शोभायमान है और दूर से ही दर्शनीय होता है।
दर्शन और पूजा का समय 2026 — Verified Schedule
सामान्य दिनों में दर्शन
सत्र | समय | विवरण |
प्रातः दर्शन | 4:00 AM – 3:30 PM | षोडशोपचार पूजा 4:00 AM पर |
मध्यान्ह बंद | 3:30 PM – 6:00 PM | आंतरिक पूजा और तैयारी |
सायं दर्शन | 6:00 PM – 9:00 PM | शृंगार पूजा 6:00 PM पर |
रुद्राभिषेक | 4:30 AM – 3:30 PM | Advance booking अनुशंसित |
श्रावण मास में विशेष दर्शन समय (2026: 30 July से)
दिन | दर्शन समय |
सोमवार | 4:00 AM – 8:00 PM |
मंगलवार से रविवार | 4:00 AM – 6:00 PM |
⚠️ ध्यान दें: श्रावण मास और महाशिवरात्रि में लाखों श्रद्धालु आते हैं। इन दिनों online booking पहले से कर लें और सुबह जल्दी पहुँचें।
VIP Darshan Pass और रुद्राभिषेक — पूरी जानकारी
VIP Darshan Pass
सामान्य दर्शन पूर्णतः निःशुल्क है। लेकिन भारी भीड़ में कम समय में दर्शन के लिए VIP pass की सुविधा उपलब्ध है:
श्रेणी | शुल्क |
भारतीय श्रद्धालु | ₹500 प्रति व्यक्ति |
विदेशी श्रद्धालु | ₹1,000 प्रति व्यक्ति |
सामान्य दर्शन | निःशुल्क |
रुद्राभिषेक शुल्क
पूजा | शुल्क | विवरण |
रुद्राभिषेक (जल से) | ₹251 | Standard पूजा सामग्री सहित |
रुद्राभिषेक (दूध से) | ₹356 | दूध और सामग्री सहित |
लघु रुद्र अभिषेक | ₹356 | वैदिक जाप सहित |
महारुद्र अभिषेक | ₹5,501 | विस्तृत वैदिक अनुष्ठान |
महामृत्युंजय जाप | ₹551 | स्वास्थ्य, शांति, दीर्घायु |
Online Booking — Step-by-Step
Official website babadham.org खोलें — यही एकमात्र authorized portal है
Account बनाएं और OTP से login करें
VIP Darshan, रुद्राभिषेक या पूजा — जो चाहिए वो select करें
तारीख और time slot चुनें
Valid ID के अनुसार details भरें और payment करें
Confirmation receipt download करें — यही मंदिर entry पर दिखाना होगा
💡 Tip: सोमवार, श्रावण मास और महाशिवरात्रि के slots जल्दी भर जाते हैं। कम से कम 1–2 सप्ताह पहले booking करें।
श्रावणी मेला और कांवड़ यात्रा — विश्व प्रसिद्ध आस्था का महाकुंभ
बाबा बैद्यनाथ धाम की पहचान केवल ज्योतिर्लिंग से नहीं, बल्कि श्रावणी मेले से भी है — जो दुनिया की सबसे बड़ी पैदल धार्मिक यात्राओं में से एक है।
श्रावणी मेला 2026: 30 जुलाई से शुरू जलाभिषेक तिथि: 3 अगस्त 2026
कांवड़ यात्रा — 105 km की आस्था
लाखों कांवड़िए बिहार के सुल्तानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरते हैं। फिर बाँस की कांवड़ में दोनों तरफ जल के बर्तन रखकर, "बोल बम! हर-हर महादेव!" का उद्घोष करते हुए, 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके देवघर पहुँचते हैं — और बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
कुछ डाक कांवड़िए (जो 24 घंटे के भीतर बिना रुके 105 km दौड़कर पूरी करते हैं) इस यात्रा को विशेष श्रद्धा और संकल्प के साथ पूर्ण करते हैं। रास्ते भर सरकारी और निजी सेवा शिविरों में मुफ्त भोजन, दवाइयाँ और विश्राम की व्यवस्था होती है।
2026 विशेष: इस वर्ष सुल्तानगंज में पूरे मेला क्षेत्र को भगवान शिव की थीम पर सजाया जा रहा है। डमरू, त्रिशूल और शिव प्रतीकों की विशेष lighting रात को यात्रा को और दिव्य बनाएगी।
प्रमुख त्योहार और विशेष अवसर
त्योहार | महीना | विशेषता |
श्री पंचमी मेला | जनवरी | बसंत पंचमी पर विशेष पूजा |
महाशिवरात्रि मेला | फरवरी–मार्च | रात भर जागरण और अभिषेक |
श्रावण मेला | जुलाई–अगस्त | कांवड़ यात्रा, लाखों श्रद्धालु |
भद्र पूर्णिमा | सितंबर | विशेष स्नान और पूजा |
हर सोमवार को यहाँ विशेष भीड़ होती है। सोमवार को सुबह 4:00 AM पर पहुँचना सबसे शुभ माना जाता है।
बाबा बैद्यनाथ धाम कैसे पहुँचें?
पता (Address)
Baba Baidyanath Temple, Baidyanath Dham, देवघर – 814112, झारखंड 📞 फोन: +91 6432 232295 (सुबह 10 AM – रात 8 PM) 🌐 Official Website: babadham.org
यात्रा के विकल्प
रेल मार्ग से (सबसे सुविधाजनक):
बैद्यनाथ धाम Railway Station — मंदिर से सिर्फ 1 km दूर, पैदल जाया जा सकता है
जसीडीह जंक्शन — मंदिर से 8 km; यहाँ से auto/taxi आसानी से मिलती है। यह देश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा है
हवाई मार्ग से:
देवघर Airport (DGH) — मंदिर से केवल 5.3 km; इसे बाबा बैद्यनाथ Airport भी कहते हैं। यहाँ से taxi ₹800 तक (4 व्यक्ति तक)
सड़क मार्ग से:
देवघर, झारखंड और बिहार के प्रमुख शहरों — पटना, रांची, भागलपुर — से NH/SH द्वारा जुड़ा है
सुल्तानगंज से देवघर: 53 km (कांवड़ यात्रा का पैदल मार्ग 105 km है)
यात्रा से पहले ज़रूरी Tips
क्या करें: सुबह 4:30–6:00 AM के बीच पहुँचें — यही समय सबसे शांत और भक्तिमय होता है। रुद्राभिषेक के लिए कम से कम एक दिन पहले babadham.org पर booking करें। मंदिर परिसर में माँ जय दुर्गा के दर्शन पहले करें, फिर बाबा के — यही परंपरा है।
क्या न करें: चमड़े के जूते, belt या बैग मंदिर परिसर में न ले जाएं। गर्भगृह में photography वर्जित है। श्रावण मास में बिना advance booking के न आएं — भीड़ असाधारण होती है।
पहनावा: पुरुष — धोती/कुर्ता; महिलाएं — साड़ी/सलवार। शालीन और पारंपरिक वस्त्र अनिवार्य।
देवघर में ठहरने की व्यवस्था: मंदिर के आसपास धर्मशालाएँ, आश्रम और budget से premium hotels उपलब्ध हैं। श्रावण मास में कम से कम 4–6 हफ्ते पहले booking करें।
FAQ Section — आपके सवाल, हमारे जवाब
Q1: बाबा बैद्यनाथ धाम में VIP दर्शन कैसे बुक करें?
Official website babadham.org पर जाएं, account बनाएं, VIP Darshan चुनें, date और slot select करें, payment करें और receipt download करें। VIP pass ₹500 प्रति व्यक्ति है।
Q2: बाबा बैद्यनाथ धाम को 'कामना लिंग' क्यों कहते हैं?
मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से माँगी गई मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। रावण की तपस्या से प्राप्त यह शिवलिंग भक्तों की कामनाओं को पूरा करने वाला है, इसलिए इसे 'कामना लिंग' कहते हैं।
Q3: श्रावणी मेला 2026 कब से शुरू होगा और कांवड़ियाँ कब जलाभिषेक करेंगे?
श्रावणी मेला 2026 का शुभारंभ 30 जुलाई 2026 को होगा। कांवड़ यात्रा का मुख्य जलाभिषेक 3 अगस्त 2026 (सावन शिवरात्रि) को किया जाएगा।
Q4: क्या इंटरनेशनल भक्त बैद्यनाथ धाम जा सकते हैं और क्या कोई खास सुविधा है?
हाँ, बैद्यनाथ धाम इंटरनेशनल तीर्थयात्रियों का दिल से स्वागत करता है। विदेशी भक्तों के लिए VIP दर्शन पास ₹1,000 प्रति व्यक्ति है। ऑफिशियल बुकिंग पोर्टल babadham.org है। अपना पासपोर्ट वैलिड ID के तौर पर साथ रखें। देवघर एयरपोर्ट से एयरपोर्ट पिकअप लगभग ₹800 में 4 लोगों के लिए उपलब्ध है।
Q5: बैद्यनाथ धाम जाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है? अक्टूबर से मार्च सबसे अच्छा मौसम है। यदि भव्य धार्मिक अनुभव चाहते हैं तो श्रावण मास में जाएं, लेकिन बहुत पहले से booking करें। Mondays विशेष रूप से शुभ हैं।
Conclusion — बाबा के दरबार में आएं, खाली हाथ न जाएं
बाबा बैद्यनाथ धाम केवल एक मंदिर नहीं है — यह एक ऐसा दिव्य स्थान है जहाँ भगवान शिव स्वयं वैद्य बनकर अपने भक्तों के कष्ट हरते हैं। जहाँ शक्ति और शिव एक साथ विराजमान हैं। जहाँ 105 किलोमीटर की कठिन यात्रा पूरी करके आया कांवड़िया भी, और हवाई जहाज़ से आया श्रद्धालु भी — दोनों को बाबा एक समान आशीर्वाद देते हैं।
यात्रा से पहले timing verify करें, babadham.org से booking करें, और पूरी श्रद्धा के साथ निकलें।
बोल बम! हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय।



