Blog16/7/2026

त्रियुगीनारायण मंदिर, उत्तराखंड — जहाँ हुआ था शिव-पार्वती का दिव्य विवाह | Complete Guide 2026

Varun Arora

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त्रियुगीनारायण मंदिर, उत्तराखंड — जहाँ हुआ था शिव-पार्वती का दिव्य विवाह | Complete Guide 2026

शिव-पार्वती के विवाह की दिव्य कथा — क्यों है त्रियुगीनारायण इतना खास?

माँ पार्वती की तपस्या से शुरू हुई वह अमर प्रेम कथा

देवी सती ने पिता दक्ष के यज्ञ में अपमान सहकर अपनी देह त्याग दी थी। उन्होंने पर्वतराज हिमावत के घर पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया। और भगवान शिव को फिर से पति रूप में पाने के लिए, पार्वती ने गौरीकुंड के पास वर्षों तक कठोर तपस्या की।

उनकी अटल भक्ति और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और विवाह के लिए सहमति दी।

त्रियुगीनारायण — वह पवित्र भूमि जहाँ सम्पन्न हुआ दिव्य विवाह

यह विवाह त्रियुगीनारायण में सम्पन्न हुआ — जो उस काल में पर्वतराज हिमावत की राजधानी था।

भगवान विष्णु ने माँ पार्वती के भाई का कर्तव्य निभाया और विवाह की समस्त व्यवस्था की। ब्रह्मा जी इस दिव्य विवाह के आचार्य (पुरोहित) बने। समस्त देवगण साक्षी थे।

मंदिर के सामने एक अग्नि-कुंड (हवन-कुंड) में वैदिक विधि से विवाह संपन्न हुआ। स्कंद पुराण में इस स्थान का उल्लेख मिलता है।

मान्यता है कि उस विवाह की अग्नि में अग्निदेव स्वयं उपस्थित थे और उन्होंने वहीं सदा के लिए निवास करने का संकल्प लिया। यही अखंड धूनी आज भी जल रही है।

'त्रियुगीनारायण' नाम का रहस्य

तीन शब्दों से बना यह नाम बहुत अर्थपूर्ण है:

  • त्रि = तीन

  • युगी = युगों से संबंधित

  • नारायण = भगवान विष्णु

यह स्थान सतयुग, त्रेतायुग और द्वापरयुग — तीनों युगों से पूजनीय है। तीनों युगों के श्रद्धालु इस हवन-कुंड में समिधा (पवित्र लकड़ी) अर्पित करते आए हैं। इसीलिए यह 'त्रियुगीनारायण' कहलाया।


अखंड धूनी — कभी न बुझने वाली वह दिव्य अग्नि

मंदिर के सामने प्रज्वलित अखंड धूनी इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है — और शायद पूरे भारत में अपनी तरह की अनूठी।

जमलोकी ब्राह्मण — जो केदारघाटी के वंशानुगत पुजारी हैं — प्रतिदिन समिधा (पवित्र लकड़ी) और घी डालकर इस अग्नि को प्रज्वलित रखते हैं। प्राचीन काल में यह अग्नि स्वयं-प्रज्वलित मानी जाती थी; कलियुग में इसे पुजारियों द्वारा निरंतर बनाए रखा जाता है।

इस धूनी की राख प्रसाद के रूप में मिलती है — जिसे भक्त अपने साथ घर ले जाते हैं। मान्यता है कि इस पवित्र राख को माथे पर लगाने से दांपत्य जीवन में सुख और स्थायित्व आता है।

यहाँ आने वाले श्रद्धालु इस अग्नि में अपनी श्रद्धानुसार समिधा अर्पित कर सकते हैं — यह परंपरा तीन युगों से चली आ रही है।


मंदिर परिसर — ब्रह्म शिला, चार कुंड और विष्णु की रजत प्रतिमा

ब्रह्म शिला — विवाह का वह पवित्र पत्थर

मंदिर के ठीक सामने एक पत्थर है जिसे ब्रह्म शिला कहते हैं। यही वह स्थान माना जाता है जहाँ शिव-पार्वती का विवाह वास्तव में संपन्न हुआ था। इस शिला को श्रद्धापूर्वक नमन करना दर्शन का एक अनिवार्य हिस्सा है।

मंदिर में क्या है?

गर्भगृह में भगवान विष्णु की दो फुट ऊँची रजत (चाँदी) प्रतिमा विराजमान है, जिनके साथ माता लक्ष्मी और माता सरस्वती हैं। मंदिर की स्थापत्यशैली केदारनाथ मंदिर से मिलती-जुलती है — उत्तराखंडी गढ़वाली शैली में पत्थर और लकड़ी से निर्मित। इसका निर्माण आदि शंकराचार्य द्वारा कराया गया माना जाता है।

चार पवित्र कुंड — दिव्य विवाह के साक्षी जल

मंदिर परिसर के पास चार पवित्र कुंड हैं — जिनमें विवाह से पहले समस्त देवगणों ने स्नान किया था:

कुंड

महत्व

उपयोग

रुद्र कुंड

भगवान शिव से सम्बद्ध

स्नान के लिए

विष्णु कुंड

भगवान विष्णु से सम्बद्ध

आत्म-शुद्धि के लिए

ब्रह्म कुंड

ब्रह्मा जी से सम्बद्ध

पेयजल के रूप में

सरस्वती कुंड

ज्ञान की देवी से सम्बद्ध

मोक्ष आशीर्वाद के लिए

सरस्वती कुंड का जल भगवान विष्णु की नाभि से उत्पन्न माना जाता है और यही जल अन्य तीनों कुंडों को भरता है। इन कुंडों में स्नान — विशेषकर संतान की कामना रखने वाले दंपतियों के लिए — अत्यंत शुभ माना जाता है।


2026 दर्शन समय — Verified Schedule

सत्र

समय

विवरण

मंदिर खुलता है

सुबह 7:00 AM

(कुछ sources में 6:00 AM)

प्रातः पूजा

6:00–7:00 AM

जमलोकी पुजारी द्वारा

प्रातः दर्शन

7:00 AM – 2:00 PM

मध्यान्ह भोग

12:00–1:00 PM

देवता को भोग अर्पण

मध्यान्ह बंद

2:00 PM – 4:00 PM

सायं दर्शन

4:00 PM – 8:00 PM

सायं आरती

रात 8:30 PM

शयन आरती

2026 Opening

9 मई 2026

यात्रा सीज़न शुरू

Closing

कार्तिक पूर्णिमा (Oct–Nov)

सर्दियों में बंद

⚠️ महत्वपूर्ण: मंदिर सर्दियों में बंद रहता है — दिसंबर से मार्च तक इस क्षेत्र में भारी हिमपात होता है और पहुँचना संभव नहीं रहता।

💡 सर्वश्रेष्ठ दर्शन समय: सुबह 7:00–9:00 AM — ताजी पर्वतीय हवा और शांत वातावरण में बाबा के दर्शन अलौकिक लगते हैं।


यात्रा से पहले Kedarnath यात्रा registration (yatra.uk.gov.in) पर latest info confirm करें।


यहाँ विवाह करें — शिव-पार्वती के विवाह स्थल पर

त्रियुगीनारायण आज Destination Wedding के लिए भारत का सबसे अनूठा और आध्यात्मिक स्थान बन रहा है।

जहाँ शिव और पार्वती ने सात फेरे लिए — वहीं उसी अखंड अग्नि के चारों ओर फेरे लेना — यह अनुभव शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।

विवाह अनुष्ठान विधि

विवाह से पहले वर और वधू पवित्र कुंड में स्नान करते हैं। फिर मंदिर में वैदिक रीति से विवाह-यज्ञ होता है। अखंड धूनी की अग्नि के चारों ओर फेरेलिए जाते हैं। अंत में धूनी की पवित्र राख दोनों के माथे पर लगाई जाती है — यही आशीर्वाद है।

विवाह की लागत (2026 approximate)

Package

Guests

लागत

Basic ceremony

2–4 guests

₹35,000–40,000

Complete package (mandap, decoration, meals)

10–50 guests

₹65,000–₹4.5 lakh

💡 महत्वपूर्ण: मंदिर में विवाह के लिए कम से कम 4–6 सप्ताह पहले advance permission और pandit booking ज़रूरी है। बिना पूर्व व्यवस्था के पहुँचने पर उचित सुविधा नहीं मिल सकती।


त्रियुगीनारायण कैसे पहुँचें?

पता: त्रियुगीनारायण गाँव, रुद्रप्रयाग जिला, उत्तराखंड — 246471

दूरी एक नज़र में

स्थान

दूरी

माध्यम

सोनप्रयाग

~12 km (सड़क)

Jeep/taxi

Sitapur से Trek

~5 km

पैदल (आसान ट्रेक)

गौरीकुंड

~5 km

Jeep/पैदल

गुप्तकाशी

~38 km

Taxi

ऋषिकेश

~212 km

Bus/Taxi

देहरादून (Airport)

~234 km

Taxi ~7 घंटे

दिल्ली

~453 km

10–12 घंटे (Haridwar, Rishikesh, Rudraprayag होते हुए)

हवाई मार्ग: जॉली ग्रांट Airport, देहरादून (~234 km) — यहाँ से taxi या bus से Rishikesh, फिर Sonprayag।

रेल मार्ग: ऋषिकेश (~212 km) — यहाँ से buses और jeeps Sonprayag तक उपलब्ध हैं।

सड़क मार्ग: Delhi → Haridwar → Rishikesh → Devprayag → Rudraprayag → Guptkashi → Sonprayag → Triyuginarayan।

सोनप्रयाग से:

  • सड़क मार्ग (~12 km): Jeep/taxi से ~ 30–45 मिनट

  • Trek (~5 km via Sitapur): 2–3 घंटे, आसान और scenic

💡 Kedarnath यात्रा के साथ combine करें: 2026 में Char Dham Yatra registration अनिवार्य है। यदि Kedarnath भी जाना हो तो yatra.uk.gov.in पर पहले register करें — Sonprayag checkpoint पर बिना registration entry नहीं मिलेगी।

⚠️ मानसून (July–August) में सावधानी: इस route पर landslide का खतरा रहता है। Flexible dates के साथ यात्रा करें और local advice जरूर लें।


GMVN में ठहरें — एकमात्र सुविधाजनक accommodation

GMVN Tourist Rest House, त्रियुगीनारायण — मंदिर गाँव में सबसे करीब और सुविधाजनक आवास:

  • 19 कमरे: 12 Standard + 7 Deluxe

  • भोजन की सुविधा उपलब्ध

  • Booking: gmvnl.com से advance में करें

सोनप्रयाग (~5–12 km दूर) में ₹600–₹2,500 प्रति रात के बजट से premium hotels तक के विकल्प उपलब्ध हैं।

💡 ATM नहीं है: त्रियुगीनारायण गाँव में कोई ATM नहीं है। Sonprayag से ही पर्याप्त नकदी साथ रखें — donation, पूजा सामग्री, भोजन और local transport के लिए।


यात्रा से पहले ज़रूरी बातें

क्या करें: सुबह जल्दी पहुँचें — 7:00–9:00 AM का दर्शन सबसे शांत और ऊर्जावान होता है। चारों कुंडों में स्नान अवश्य करें, विशेषकर रुद्र कुंड में। अखंड धूनी में श्रद्धानुसार समिधा अर्पित करें और राख प्रसाद के रूप में लें। यदि Kedarnath यात्रा के साथ combine कर रहे हैं तो पहले registration करें।

क्या न करें: सर्दियों (दिसंबर–मार्च) में न जाएं — मंदिर बंद रहता है और रास्ता खतरनाक। बिना advance booking के विवाह की योजना न बनाएं। Shorts या आधे कपड़ों में मंदिर में न जाएं। कूड़ा मंदिर परिसर में न फेंकें — यह देवभूमि है।

पोशाक: शालीन और पारंपरिक वस्त्र। महिलाएं दर्शन के समय सिर ढकें। गर्म कपड़े ज़रूर लाएं — ऊँचाई पर हर मौसम में ठंड रहती है।


FAQ Section — आपके सवाल, हमारे जवाब

Q1: त्रियुगीनारायण मंदिर 2026 में कब खुला और दर्शन का समय क्या है?

मंदिर 2026 यात्रा सीज़न के लिए 9 मई 2026 को खुला। दर्शन सुबह 7:00 AM से दोपहर 2:00 PM और शाम 4:00 PM से रात 8:00 PM तक होते हैं। मंदिर कार्तिक पूर्णिमा (अक्टूबर–नवंबर) के बाद बंद हो जाता है।

Q2: त्रियुगीनारायण में विवाह करने की क्या लागत है और कैसे बुक करें?

Basic ceremony (2–4 guests) ₹35,000–40,000 में होती है। पूर्ण package (10–50 guests) ₹65,000 से ₹4.5 lakh तक जाता है। कम से कम 4–6 सप्ताह पहले temple trust और pandit से advance booking ज़रूरी है।

Q3: अखंड धूनी क्या है और इसकी राख क्यों लेते हैं?

अखंड धूनी वह दिव्य अग्नि है जो शिव-पार्वती के विवाह के हवन-कुंड से जल रही है। इसकी राख (भस्म) दांपत्य सुख और प्रेम में स्थायित्व का प्रतीक मानी जाती है। भक्त इसे प्रसाद के रूप में माथे पर लगाते हैं।

Q4: क्या विदेशी जोड़े त्रियुगीनारायण मंदिर में शादी कर सकते हैं?

हाँ, त्रियुगीनारायण मंदिर सभी बैकग्राउंड के जोड़ों का पवित्र हिंदू शादी समारोह के लिए स्वागत करता है। यह समारोह जमलोकी ब्राह्मण पुजारियों द्वारा किए गए वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार होता है। मंदिर ट्रस्ट से पहले से परमिशन लेना और लोकल पुजारी से कोऑर्डिनेशन ज़रूरी है — कम से कम 4–6 हफ़्ते पहले। शादी समारोह सुबह 6:00 बजे से रात 8:00 बजे के बीच होते हैं।

Q5: सोनप्रयाग से त्रियुगीनारायण कैसे पहुँचें? सोनप्रयाग से दो रास्ते हैं: सड़क मार्ग से ~12 km (Jeep/taxi में ~45 मिनट), या Sitapur से ~5 km का आसान trek (2–3 घंटे)। Kedarnath यात्रियों के लिए यह route बेहद convenient है।


Conclusion — जहाँ शिव-पार्वती का प्रेम है, वहाँ हर विवाह अमर है

त्रियुगीनारायण केवल एक मंदिर नहीं — यह उस अमर प्रेम का साक्षी है जो सतयुग से चला आ रहा है।

अखंड धूनी की जलती हुई लौ, ब्रह्म शिला का मौन स्पर्श, चारों कुंडों का पवित्र जल — यहाँ आकर हर श्रद्धालु को लगता है कि वह समय की किसी दूसरी परत में पहुँच गया है। जहाँ शिव और पार्वती अब भी विद्यमान हैं।

यदि आप विवाह के लिए किसी ऐसे स्थान की तलाश में हैं जहाँ हर फेरे के साथ भगवान का आशीर्वाद मिले — तो त्रियुगीनारायण से श्रेष्ठ स्थान कोई नहीं।


ॐ नमः शिवाय। जय माँ पार्वती। हर हर महादेव।


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